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You searched for: subject:"कोलख्यान"
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[texts]ढलती उम्र में मन की उठान - प्रफुल्ल कोलख्यान
मनुष्य का मन धरती की ही तरह जटिल होता है। सूखी और तपती हुई धरती आषाढ़ की पहली बूँद के स्पर्श से ही नाच उठती है। धरती नित्य यौवना है, मनुष्य का मन निन-नित नूतन होता है। अनूकूल हवा-पानी मिलते ही मन ...
Keywords: कोलख्यान; hindi
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[texts]चिढ़ का चौताल - प्रफुल्ल कोलख्यान
अधिक पढ़े-लिखे आदमी का इतिहास से जो रिश्ता होता है, कम पढ़े-लिखे का वही नाता किंवदंतियों से होता है। कम पढ़ा-लिखा आदमी किंवदंतियों की चरितकथा की छानबीन में अपना वक्त जाया नहीं करता, प्रेरणा ले...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]पत्रहीन नग्न गाछ - प्रफुल्ल कोलख्यान
पीढ़ी के प्रतिनिधि नायक का अद्भुत उत्तर सुनकर, सहम गई थी वह चिड़िया जिसके पूरे वजूद को अनदेखा कर सिर्फ उसकी आँख को ही देख पाने को स्वीकारा था प्रतिनिधि नायक ने! विकल हो गया था वृक्ष जो रह गया था ...
Keywords: कोलख्यान; hindi
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[texts]दुविधा में नीलू - प्रफुल्ल कोलख्यान
गरीब के घर की दीवारें कच्ची होती है। दीवारों के किसी कमजोर हिस्से को धराशायी करती हुई खुशियाँ निकल भी जाती है। यह नहीं कि हर बार ऐसा ही होता है लेकिन अधिकतर बार ऐसा ही होता है। ऐसा है यह दुश्चक्...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]भय और भरोसा - प्रफुल्ल कोलख्यान
मनुष्य भूत से डरता है और भगवान पर भरोसा कर अपने भय को काबू में करने की कोशिश करता रहा है। लेकिन जब भूत ही भगवान बनकरसामने आ जाये तो? जो सामाजिक शक्ति और संगठन भरोसा का आधार बनाते थे वे सामाजिक शक...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कविता - प्रफुल्ल कोलख्यान
चिता की लपट मद्धम न पड़ जाये और उजाला किये जाने का भरम बना रहे इसका ख्यालकर तेजी से सुलगाये जा रहे हैं जंगल
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]ओनामासीधं - प्रफुल्ल कोलख्यान
बचपन में हमलोग ओनामासीधं गुरूजी खसला -- गिर पड़े -- चितंग कहकर अपने गुरूडमयुक्त साथी के साथ ठट्ठा किया करते थे। बाद में जाना कि असल में ‘ऊँ नम: सिद्धम’ ही जनविमुख होकर अंतत: ‘ओनामासीधं’ के रूप मे...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]किसने कहा जय किसान - प्रफुल्ल कोलख्यान
आज स्कूलों में न तो प्रार्थना है, न संविधान की प्रस्तावना के हम लोग और न ही भारत माता। न तो बच्चों के मन में उस प्रकार की जिज्ञासा है और न ही परिवार में उस दादी माँ के लिए कोई जगह है  जिसमें अपने क...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]अपने वतन में पराए - प्रफुल्ल कोलख्यान (Prafulla kolkhyan)
अपने मूल भाषा-क्षेत्र से बाहर रह कर छोटे-मोटे रोजगार और खुदरा कारोबार में लगे लोगों को निकृष्टतम अर्थों में अपने ‘बाहरी’ होने का भारी दबाव झेलना पड़ रहा है। ऐसा लगता है कि राज्य सरकारों की निग...
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan
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[texts]भाषा में भ्रांति - प्रफुल्ल कोलख्यान (Prafulla kolkhyan)
भाषा सामाजिकता की जीवनी शक्ति और सौंदर्य-शक्ति को भी सुगठित और संरक्षित करती है। लक्षित किया जा सकता है कि कैसे एक भाषा के गर्भ में पलती हुई दूसरी भाषा उससे बाहर निकलकर एक नये भाषिक प्रस्थान क...
Keywords: कोलख्यान,Kolkhyan
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[texts]भिखारी सारी दुनिया - प्रफुल्ल कोलख्यान
बाहर बहुत तेजी से फैलते हुए बाजार का विचार हमें गरीब और भीतर का बेलगाम लालच भिखारी बना रहा है। ऐसा लगता है कि सचमुच सारी दुनिया भिखारी हो गयी है। ऐसे में महात्मा गाँधी की याद आना सहज स्वाभाविक ...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]अच्छी हिंदी - प्रफुल्ल कोलख्यान
मेरी हिंदी बहुत ही कमजोर थी। आज भी बहुत मजबूत होने का दावा नहीं है। लिखने में बहुत ही अशुद्धियाँ हुआ करती थीं। अशुद्धियाँ आज नहीं होती हैं, ऐसा नहीं है। लेकिन पहले होनेवाली अशुद्धियों की तुलन...
Keywords: kolkhyan,कोलख्यान
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[texts]गुजरात के गाँधी और अयोध्या के राम - प्रफुल्ल कोलख्यान
राम को अयोध्या और गाँधी को गुजरात में सीमित करना स्थानीयकरण की प्रक्रिया का ही प्रकार्य तो नहीं है! कहीं हम अपनी मासूमियत में राम और गाँधी जैसे जनता के चित्त-नायक के विसर्जन और बाजार के वित्त-...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]व्यक्ति, समाज और साहित्य - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
समाज द्वारा प्रदत्त साहस की सीमा-रेखा से बाहर जाकर किये जानेवाले आचरण को ही समाज अपराध करार देता है। वस्तुत: समाज विरोधी आचरण का भी एक सामाजिक पहलू होता है। समाज और व्यक्ति का चुंबकीय संबंध दो...
Keywords: kolkhyan,कोलख्यान
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[texts]अपने मोर्चे पर मरने की जिद्द - प्रफुल्ल कोलख्यान
.... घर के बदले पहुँच गया अजायब घर। डेढ़ दो घंटे तक घूम-फिर कर देखने के बाद मन कुछ हल्का था। और था यह एहसास कि किन-किन मुश्किलों का सामना करते हुए, उन पर अपने ढंग की विजय हासिल करते हुए मनुष्य आज तक क...
Keywords: kolkhyan; hindi; कोलख्यान
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कविता - प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रफुल्ल कोलख्यान की कविता
Keywords: कोलख्यान,कविता,kolkhyan
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[texts]सभ्यता फिर भी उम्मीद से है - प्रफुल्ल कोलख्यान
बाजारवाद मछली के ही तेल में मछली को भुनने की कारीगरी जानता है। मकरजाल की तरह ‘मनुख-जाल’ उपभोक्ता मन के भीतर से पैदा होता है। …बाजारवाद की मनोरंजक संस्कृति हँसते-हँसाते मनुष्य की प्रतिरोध क्ष...
Keywords: कोलख्यान; सभ्यता; बाजारवाद; kolkhyan
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[texts]Prafulla Kolkhyan TERAH KATHWA - प्रफुल्ल कोलख्यान
एक कहानीः तेरह कट्ठवा एक तरफ बाढ़ का पानी और दूसरी तरफ कुमिया की अधखुली आँख की कोर से ढरकते आँसू। उस आँसू की भाखा कौन पढ़े। जो पढ़े सो ज्ञानी होए। जनम कृतार्थ हो जाये। दोनो तरफ पानी-ही-पानी। पा...
Keywords: कहानी; कोलख्यान; hindi; kahani
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कुछ कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
एक अच्छी कविता के बारे मेंसोचते हुएमैं आपके बारे मेंसोचने लगता हूँआपके बारे मेंसोचते हुए मैंएक अच्छी कविता के बारे मेंसोचने लगता हूँ
Keywords: कोलख्यान; कविता; kolkhyan; hindi
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[texts]दगा की, इस सभ्यता ने दगा की - प्रफुल्ल कोलख्यान
जब-जब यह निरपराध आम आदमी मारा जाता है तब-तब तथाकथित खास आदमी की सुरक्षा कड़ी कर दी जाती है । जिस सभ्यता में राजा को किला बनाकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की छूट हासिल होती है, वह सभ्यता एक दगाब...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]इनकार का हक और हक का इनकार - प्रफुल्ल कोलख्यान
मकान बनाने की ललक बढ़ी है। घर बसाने की ईहा कम हुई है। तलाक की घटना की संख्या में चिंतनीय वृद्धि हुई है। इन्हें जीवन-यापन में स्थायित्व के अवसरों की कमी से भी जोड़कर देखा जा सकता है। ......
Keywords: कोलख्यान; हक; इनकार; kolkhyan
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[texts]सीमांत पर हिंदी - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
सीमांत पर हिंदी
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan,hindi,हिंदी
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[texts]नागरिक जमात का रास्ता - प्रफुल्ल कोलख्यान
राजनीति और समाज, दोनों को जोड़ने वाला सामान्य तत्त्व लोकतंत्र होता है। परंपरा में जिंदा उच्चतर मूल्यों को समाज में बचाए रखना और आधुनिक मूल्यबोध की सामाजिक स्वीकृति के लिए संघर्ष आजादी के आं...
Keywords: कोलख्यान; नागरिक; kolkhyan
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[texts]ग्लोबल का बल और राष्ट्रीयता - प्रफुल्ल कोलख्यान
व्यव्स्था चाहे जैसी भी हो, शासन के सत्य और जनता के सत्य में अंतर तो रहता ही है। …. राजनीतिक आजादी के मिलने और जनतंत्र की स्थापना के बाद के प्रारंभिक वर्षों से ही भारत में शासन के सत्य और जनता के स...
Keywords: कोलख्यान; ग्लोबल; राष्ट्रीयता; kolkhyan
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[texts]असंतोष और आलोचना के बीच आम चुनाव - प्रफुल्ल कोलख्यान
राष्ट्र के सिकुड़ने और बाजार के फैलने के इस संक्रमणकाल में राष्ट्रीय संरचना में अंदर-ही-अंदर बदलाव हो रहा है। यह माना जाना चाहिए कि राष्ट्र के सिकुड़ने और बाजार के फैलने से भारतीय गणराज्य की ...
Keywords: kolkhyan; कोलख्यान; हिंदी; Hindi
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[texts]जी हाँ... मैं लिखता हूँ... दुख पर काबू पाने के लिए - प्रफुल्ल कोलख्यान
समग्र और वास्तविक दुख या सुख कभी भी व्यक्तिगत मामला नहीं हुआ करता है। दुख और सुख हमारे सामाजिक जीवन का ही व्यक्त्विगत सारांश होता है। दुख है कि आज भी जिधर अन्याय है, उधर ही शक्ति है; बल्कि यह कि ...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; hindi; kolkhyan
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कुछ कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
इसके पहले कि अखबार में कोई नया लीड आयेमैं जल्दी-से-जल्दीकिलकते हुएबच्चों को चूम लेना चाहता हूँ।
Keywords: कोलख्यान; कविताएँ; kolkhyan; hindi
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[texts]चिढ़ का चौताल - प्रफुल्ल कोलख्यान
चिढ़ना व्यक्तिगत भी होता है और सामाजिक, सामुदायिक, दलीय भी। सुना है, मिथिलांचल के एक गांव के निवासी ‘चटनी-पापड़’ कहने से बुरी तरह चिढ़ते हैं। एक सज्जन बड़े लजालू ढंग से बता रहे थे कि उनके मुहल्...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; kolkhyan
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[texts]सावधानी और श्रद्धा - प्रफुल्ल कोलख्यान
इस बात पर सहमति तो बन ही गई कि ‘किताबी’ बातों पर श्रद्धा रखना और जीवन में उसे सावधानी से बरतना ही पढ़ने-लिखने की सार्थकता भी है और जीवन को मनोरम बनाने में हमारे योगदान का तरीका भी है।
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]लोकतंत्र का चेहरा, चरित्र और सिविल सोसाइटी - प्रफुल्ल कोलख्यान
यह सच है कि वर्तमान लोकतंत्र अपर्याप्त है लेकिन अपरिहार्य भी है, कम-से-कम अभी तो अपरिहार्य ही है। अपर्याप्त का अपरिहार्य होना पूँजीवाद के मर्म से निकले आधुनिक लोकतंत्र की न सिर्फ विडंबना, बल्...
Keywords: कोलख्यान; अण्णा; kolkhyan; anna
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[texts]प्रार्थना और प्रहार - प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रार्थना प्राण का कवच नहीं बन सकती। प्रार्थना चाहे जितनी विशिष्ट क्यों न हो वह अंतत: रिरियाहट ही होती है। एक ऐसी रिरियाहट जिसकी कोख में पलती रहती है बर्बरता। किसी कल्पित देवता के मने रिरिया...
Keywords: कोलख्यान; प्रार्थना; kolkhyan
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कुछ कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
Prafulla Kolkhyan Ki Kavitayen.
Keywords: kolkhyan,कोलख्यान,कविता; hindi
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[texts]दलित राजनीति की समस्याएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
दलित एक विशुद्ध भारतीय स्थिति है और इसीलिए ‘दलित राजनीति की समस्या’ अपने मूल चरित्र में बिल्कुल भारतीय यथार्थ है। दलित का अर्थ और अभिप्राय सिर्फ भारतीय संदर्भ से हासिल किये जा सकते हैं। दलि...
Keywords: दलित,कोलख्यान,kolkhyan
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[texts]अभिप्राय और अर्थ - प्रफुल्ल कोलख्यान
डिब्बे के ऊपर की इबारत चाहे जो बताये गृहस्थ जानता है कि किस डिब्बे में चीनी है किस में नमक! क्षण-क्षण रीतते हुए शब्दों में गृहस्थी के काम लायक अर्थ सँजोने की चिंता करनी ही होगी। आजकल सामान का व्...
Keywords: कोलख्यान,हिंदी,hindi,kolkhyan
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[texts]सामाजिक जनतंत्र के सवाल - प्रफुल्ल कोलख्यान
जनतंत्र के राजनीतिक ढाँचे में सामाजिक हित की अंतर्वस्तु के संस्थापन की अटूट प्रक्रिया के सही ढंग से निरंतर संपादित न होते रहने से राजनीतिक जनतंत्र भारी असंतुलन का शिकार हो जाता है। इस असंतु...
Keywords: कोलख्यान; जनतंत्र; सामाजिक; kolkhyan
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[texts]व्यक्ति, समाज और साहित्य - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
असल में व्यक्तित्व समाज का सार होता है। व्यक्तिवाद समाज को कमजोर करता है। जब समाज कमजोर हो तो उसका सार प्रभावशील कैसे बन सकता है? प्रसंगवश, इस समाज के अधिक मूर्त्त और अंतरंग बनाव को ही परिवार क...
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan,व्यक्ति
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[texts]दलित राजनीति की समस्याएँ - Prafulla Kolkhyan प्रफुल्ल कोलख्यान
दलित एक विशुद्ध भारतीय स्थिति है और इसीलिए `दलित राजनीति की समस्या' अपने मूल चरित्र में बिल्कुल भारतीय यथार्थ है। दलित का अर्थ और अभिप्राय सिर्फ भारतीय संदर्भ से हासिल किये जा सकते हैं। दलित ...
Keywords: kolkhyan,कोलख्यान; dalit
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[texts]चाइनिज बॉल - प्रफुल्ल कोलख्यान
भूमंडलीकरण के दौर में ‘राष्ट्रवाद’ के नये सिरे से प्रासंगिक होने के कारण या पता नहीं दिमाग के में जमे किन निष्कर्षों के कारण उस नौजवान का करतब जितना अचरज में डाल गया, उतना ही उसका खुद को चाइनि...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; hindi
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[texts]चिढ़ का चौताल - प्रफुल्ल कोलख्यान
चिढ़ना व्यक्तिगत भी होता है और सामाजिक, सामुदायिक, दलीय भी। सुना है, मिथिलांचल के एक गांव के निवासी ‘चटनी-पापड़’ कहने से बुरी तरह चिढ़ते हैं। एक सज्जन बड़े लजालू ढंग से बता रहे थे कि उनके मुहल्...
Keywords: कोलख्यान; चिढ़; हिंदी; kolkhyan
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[texts]बीच बाजार, माँ का आँचल तार-तार - प्रफुल्ल कोलख्यान
माँ का दूध जो संतान के लिए सब से अधिक सुरक्षित और सुनिश्चित आहार था  अब  बाजार वहाँ भी पहुँच गया। माँ का दूध भी पण्य हो गया! हिंदू धर्म में गाय को माँ के रूप में मानने का आग्रह, प्रचलन और उससे अधिक ...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]कुछ तो, बताओ मनोरमा - प्रफुल्ल कोलख्यान
सभ्यता ने उस मंदिर को `खुजराहो मंदिर' का नाम दिया था। पता नहीं सच है या झूठ है, लेकिन लोग कहते हैं कि उन्हीं पत्थरों में से किसी-न-किसी को मुहब्बत महल की हर नींव में डाला जाता रहा है। तब से अब तक कि...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की तीन कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
सचमुच एक दुर्लभ दृश्य है स्तनपान कराती हुई माता को देखना जब मैंने आर्टगैलरी में एक ऐसी ही पेंटिंग पर मुग्ध होते विदेशी को देखा तो महसूस किया
Keywords: kolkhyan,कोलख्यान,कविता; kavitayen
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[texts]पावस मृदुल-मृदुल बरसे - फ्रफुल्ल कोलख्यान
सामाजिकता संबंधों के समुच्चय का ही एक नाम है। आज का एक बड़ा समाजिक संकट यह है कि संबंधों के बीच का पानी सूख गया है। चाहे  संबंध मनुष्य के साथ के हों या अन्य प्राणियों और प्रकृति के ही साथ के क्यो...
Keywords: कोलख्यान; पावस; kolkhyan; hindi
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
वह कौन लगता हैहमारा आपका हम सबकाउसे किस भाषा में बतायें कि उसे प्यार करना चाहिएयह उसका देश है
Keywords: कोलख्यान; कविता; kolkhyan; kavita
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[texts]आलोचना और समाज - प्रफुल्ल कोलख्यान
समाज में पहले से व्याप्त यौनमूलक भेद-भाव और शोषण का सहारा लेकर विकृतिकरण का यह प्रयास अधिक समतामूलक दीखने और अपनी वैधता साबित करने में सफल हो जाता है।... बाजार, धर्म, काम और भाषा की आत्मिक संश्ल...
Keywords: कोलख्यान; समाज; आलोचना; kolkhyan
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[texts]दूर के रिश्तेदार - प्रफुल्ल कोलख्यान
झुर्रियों की लिपि दर्द की भाषा पढ़ने की कोई तरकीब होती या रिश्तों की दूरी मापनेवाला कोई फीता होता तो कोई बड़ी आसानी से नाप ले सकता कि मैं और मेरे जैसे बहुत सारे बेटे अपने-अपने माँ-बाप के कितने द...
Keywords: कोलख्यान,हिंदी,kolkhyan,hindi
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[texts]कुछ तो हक अदा हुआ - प्रफुल्ल कोलख्यान
मातृभाषा का अपना महत्त्व हुआ करता है। निश्चित रूप से इसे स्वीकार करना ही चाहिए। लेकिन राष्ट्रभाषाओं या राजभाषाओं का भी अपना महत्त्व हुआ करता है। राष्ट्रीय जीवन में इसकी अवहेलना नहीं की जा स...
Keywords: कोलख्यान; नागार्जुन; kolkhyan; nagarjun
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[texts]त्यौहार का तर्क - प्रफुल्ल कोलख्यान
त्यौहार संघर्ष और संतोष, आकांक्षा और उपलब्धि की अंतराल-भूमि पर वह बाग बनकर आता है जहाँ मनुष्य अपनी पीठ पर से सुख-दुख समेत उपलब्धियों की गठरी को उतार कर अपनी आँख में सपनों के पुनर्भव होने के एहस...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan; हिंदी
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[texts]भारत संघ की संरचना - प्रफुल्ल कोलख्यान
मुझे इस बात की चिंता हो रही है कि भारत संघ की आंतरिक संरचना में विघटनकारी बदलाव हो रहे हैं। भारत का संविधान एक विचार भी है और भावना भी।
Keywords: कोलख्यान; हिंदीसआलोचना; kolkhyan; hindi
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[texts]सांप्रदायिकता Link - प्रफुल्ल कोलख्यान
सांप्रदायिकता के बारे में 
Keywords: कोलख्यान.सांप्रदायिकता; kolkhyan
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